गोडबोले ने अपनी फेसबुक पोस्ट में शहर की यातायात व्यवस्था को "अत्यंत दयनीय" बताते हुए लिखा कि जबलपुर में लेफ्ट-राइट टर्न, आटो चालकों और मैकेनिकों का कब्जा है तथा इस स्थिति पर कोई प्रभावी कार्रवाई या ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनकी इस टिप्पणी के बाद शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
गौरतलब है कि जबलपुर में कई प्रमुख चौराहों और सड़कों पर यातायात अव्यवस्था, अतिक्रमण, अवैध पार्किंग तथा मनमाने ढंग से खड़े वाहनों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। आम नागरिक भी सोशल मीडिया और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से कई बार इन समस्याओं को उठा चुके हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब अपनी ही सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े लोग सार्वजनिक मंच पर व्यवस्था पर सवाल उठाने लगें तो यह संकेत है कि जमीनी स्तर पर समस्याएं गंभीर हैं। ऐसे में संबंधित विभागों और प्रशासन को स्थिति का संज्ञान लेकर सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है।
अब देखना यह होगा कि वरिष्ठ नेता द्वारा उठाए गए इन सवालों के बाद यातायात पुलिस, नगर निगम और जिला प्रशासन शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या कदम उठाते हैं, या फिर यह मुद्दा भी अन्य शिकायतों की तरह केवल सोशल मीडिया तक ही सीमित रह जाएगा।
