बड़ी खबर: जबलपुर के इस अस्पताल के मालिक, डॉक्टर, मैनेजर व सीईओ के खिलाफ दर्ज हुआ गैर इरादतन हत्या एवं धोखाधड़ी का प्रकरण

हमारा इंडिया न्यूज (हर पल हर खबर) मध्यप्रदेश/जबलपुर। थाना प्रभारी ओमती श्री प्रफुल्ल श्रीवास्तव ने बताया कि एडवोकेट श्री महेंद्र श्रीवास  निवासी  शीतला माई घमापुर ने मान्नीय न्यायालय में 156(3) जाफौ. के  तहत परिवाद प्रस्तुत किया था कि उसने अपने पिता  विजय कुमार श्रीवास को दिनांक 23/03/21 को सिटी हास्पिटल में  सी.जी.एच.एस. सुविधा के तहत एडमिड कराया था जहां उन्हें एडमिड करने के पश्चात वही उनका सी.टी. स्केन कराया गया । सी.टी. स्केन में डां. प्रदीप पटेल ने बताया कि आपके पिताजी कोरोना पाजीटिव है तथा उनका सी.टी. स्कोप 14/25 है   डां. प्रदीप के कहने पर उसने 13 से 14 दिन इलाज कराने के बाद अपने पिताजी को दिनांक 10/04/21 को डिस्चार्ज करा लिया जबकि उनकी आक्सीजन लेवल 80 से 82 था लेकिन डांक्टर ने उसे एवं उसके परिवार वालो को डरा दिया गया कि यदि आप लोग अपने पिताजी को यहा से डिस्चार्ज नहीं करवा कर ले जायगें तो आपके पिताजी को इनफेक्सन हो जायेगा । हमारे द्वारा पूछा गया कि जो पहले इनफेक्सन था तो वह ठीक हो गया या नहीं , तो डाक्टर ने कहा मैं बोल रहा हूँ ले जाओ तो बस ले जाओ रिपोर्ट डाक्टर के देखने के लिये होती है आम लोगो के लिये नहीं , इस प्रकार हमे पिता जी को डिस्चार्ज कराने के लिये मजबूर किया हम लोग आक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था करके अपने पिताजी को डिस्चार्ज करा कर घर ले आये जहाँ उनकी तबियत और बिगडती गई और हम लोगो ने उनको पुनः सिटी हास्पिटल में दिनांक 13/04/21 को आईसीयू फर्स्ट ट्राँमा में एडमिड कराया, उनका पुनः सी.टी स्केन कराया गया जिसमें उनका स्कोप 18/25 बताया गया उसे इस स्केन की जानकारी सी.टी हास्पिटल में स्केन करने वाली सी.टी. स्केन   प्रभारी  उषा ठाकुर ने बताई  थी । अगर पहली बार एडमिड कराने पर ही उसके पिता जी ठीक नहीं हुये थे तो डां. प्रदीप पटेल द्वारा उसे व उसके परिवार वालो को उसके पताजी को डिस्चार्ज कराने का दबाव नहीं बनाना था जिससे डां. प्रदीप पटेल और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही नजर आती है  । यदि उसके पिताजी ठीक हो गये थे तो महज दो दिनो के अंदर उसके पिताजी को फिर से इंफेक्सन बढकर  कैसे हो गया ।




यहॉ पर सबसे महत्वपूर्ण  बात यह है कि उसके पिता जी को नकली रेमडिसिवर इंजेक्सन लगा कर उनका इलाज किया गया क्योकि इंजेक्सन लगने के बाद भी इन्फेक्शन बढ जाना डां. की लापरवाही दर्शाता है उसेे डां. पटेल द्वारा ही इलाज के दौरान बताया गया था कि उन्होने उसकेे पिता जी को 07 रेमडीसिवर इंजेक्सन लगाये है जबकि ये जानकारी न्यूज एवं अखबार के माध्यम से प्राप्त है कि कुल 06 रेमडिसिवर इंजेस्शन लगते है उससे अधिक नहीं,  उसके द्वारा जब इसका विरोध किया गया तो मुझे ये बोल कर चुप कराया गया कि चुप रहो हमको पता है क्या करना है क्या नहीं । हम लोग चुप हो गये क्योकि जबलपुर शहर में कोरोना संक्रमित व्यक्तियो की संख्या बढती जा रही थी और अगर हम दूसरे अस्पताल में ले जाने का सोचते तो शायद हम लोगो को वहा बेड नहीं मिलता जिसके कारण हमारे पास कोई और विकल्प नहीं था।           

अगर पहली बार में ही पिताजी का इलाज सही तरीके से किया गया होता और जल्दबाजी नहीं की जाती तो शायद उसके  पिता  जीवित रहते,  पिता जी  दूसरी बार में आईसीयू फर्स्ट ट्रामा में भर्ती थे और उनकी मृत्यु के 2-3 दिन पहले   इस बात का विरोध किया कि आईसीयू फर्स्ट ट्रामा वार्ड मे ही आप लोगो ने कोविड एवं नान कोविड मरीजो को एक साथ भर्ती किया है तो इस बात को लेकर सोनिया खत्री (मैनेजर) और अभिषेक चक्रवर्ती (सीईओ) से  कहा सुनी भी हो गई थी उनके द्वारा यह कहा गया कि आपको ये सब समस्या है तो आप अपने मरीज को किसी और अस्पताल या अपने घर ले जाये ये हमारा अस्पताल है हम जैसा चाहेगें वैसा करेगे और इसके बाद जब उसके पिता जी धीमी गति से रिकवर कर रहे थे तब इन लोगो के द्वारा 30 घंटे के भीतर बिना किसी बात के उसके पिता जी को दूसरा (सेंकेड्री) इंफेक्सन बता कर कार्डियक बिल्डिंग के आईसीयू वार्ड में उनकी पहले से नाजुक स्थिती होते हुये भी शिफ्ट कर दिया जहाँ पर उनकी मृत्यु दिनांक 03/05/21 को हो गई और मृत्यु प्रमाण पत्र में सडन कार्डिक अरेस्ट लिख दिया गया ।

            

मोखा ( आनर आफ द सिटी हास्पिटल) नकली इंजेस्शन का उपयोग अपने अस्पताल में करवाता था और कोरोना प्रोटोकाल के नाम पर इलाज देखने सुनने नहीं मिलता था न ही डां. द्वारा क्या इलाज किया जा रहा बताया गया तथा मरीज की दवाईयों की दुकान वालो को उनके व्हाट्सप पर मैसिज की जाती थी जिससे ये पता नहीं होता कि कौन सी दवाईंया मरीज को दी जा रही थी तथा ये डां. की भी जबाबदारी थी कि वो नकली इंजैेक्सन का उपयोग न करें और जिस प्रकार से सोनिया खत्री (मैनेजर) एवं अभिषेक चक्रवर्ती सुबह से लेकर शाम तक पैसे के पीछे भाग रहे थे दोनो लोग बिस्तर होते हुये भी कोविड मरीज को बिस्तर नहीं है बोल कर भगा रहे थे और अपने अस्पताल में दलाल के जैसे काम कर रहे थे ,इस बात की पुष्टि तब हुई जब उसके पिताजी  अस्पताल में एडमिड थे तो उनके लिए कुछ बात करने गया तो बिना  चेहरा देखे ही अभिषेक द्वारा बोला गया तीन लाख लाओ बरना विस्तर नहीं है ।  जो व्यक्ति रसूखदार या मौखा के पहचान का या राजनीतिक हैसियत वाला या अन्य दलालों के माध्यम से आता था एक लाख की जगह तीन लाख लेकर अस्पताल में बिस्तर दिलवा रहा था।

               

सोनिया खत्री ,अभिषेक चक्रवर्ती, डां. प्रदीप पटेल और सरबजीत सिंह मौखा चारो की ही मीटिंग के बाद ही आईसीयू फर्स्ट ट्रांमा में कोविड मरीजो को नान कोविड मरीजो के साथ एडमिड कराना चालू किया जाने लगा और जब उसने विरोध किया तो सोनिया खत्री और अभिषेक चक्रवर्ती ने उससे कहा कि तुझे बाद में देखते है।                

सिटी  अस्पताल के कारनामे बस इतने ही नहीं कुछ दिनो पहले मिलोनीगंज निवासी भरत तिवारी अपना इलाज कराने इस अस्पताल आये थे जहां सिटी स्कैन करने के बाद उन्हें कोरोना पोजिटिव बता दिया गया था और उन्हें अस्पताल में एडमिड होने के लिये विक्टोरिया या मेडिकल कहा गया था किंतु वो एडमिड न होकर घर चले गये और लगभग एक हफ्ते बाद उनकी बहू ने सिटी हास्पिटल का एक वीडियो बनाया था उनकी बहू ने उनका कोबिड टेस्ट करवाया था जो कि नेगेटिव था और भरत तिवारी जी आज दिनांक तक पूर्णतः स्वस्थय और जीवित है।          

दिनांक 03/05/21 को जिस दिन उसके पिताजी की मृत्यु हुई तो उनकी मृत्यु से पहले वह अस्पताल में उनके पास बैठा था तो जब मेरे पिताजी पहली बार सिटी हास्पिटल से डिस्चार्ज हुये थे तब उनकी मेडिकल फाईल देख रहा था तो उसमें पाया कि  पिताजी की फाईल में दूसरे दूसरे मरीजो के नामो की जांच  की रिपोर्ट लगी हुई थी और उसी जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल में काम करने वाले सिस्टर व वार्ड वाय मरीज को आकर वह दवाईया खिलाते थेे। इससे यह ज्ञात होता है कि जब  पिताजी के इलाज में दूसरे दूसरे जांच की रिपोर्टे  लगी हुई है तो सही इलाज सही दिशा में हुआ ही नहीं,  यह एक मेडिकल नेगलिजेंसी का मामला बनता है जिसकी पूरी जबाबदारी डाक्टर तथा अस्पताल प्रशासन की है ।

                

सरबजीत सिंह मौखा के नकली इंजेक्शन से व डां. पटेल की नेगलिजेंसी से तथा सोनिया खत्री और अभिषेक चक्रवर्ती के मीटिंग के बाद से ही फर्स्ट आईसीयू  फर्स्ट ट्रामा में कोविड मरीजो को नानकोविड मरीजो के साथ रखना जिससे मेरे पिताजी का संक्रमण इंफेक्सन बढता चला गया इन चारो ने मिलकर मेरे पिताजी की जान ली है।

न्यायालय श्री तन्मय सिंह न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा  आवेदन पत्र के आधार पर संज्ञेय अपराध के तथ्य प्रकट होने पर सुसगंत धाराओं के तहत प्रथम सूचना पत्र लेख किये जाने हेतु आदेशित किये जाने पर सिटी हास्पिटल संचालक सरबजीत मौखा डां. प्रदीप पटेल सोनिया खत्री ,अभिषेक चक्रवर्ती (सी.आई.ओ.) के विरूद्ध धारा 201,274,275,304,420,467,468,471,34,120 बी भा.द.वि. 53 आप.प्र. अधि.,3 महा.अधि.,5/13 ड्रग्स कंट्रोल अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया गया।*

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