जानकारी के अनुसार अमित राय ने 26 सितंबर 2025 को थाना आधारताल में अपराध क्रमांक 1013/25, धारा 304 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। यह मामला भाजपा मंडल अध्यक्ष अमित राय की माताजी के साथ हुई चैन लूट की वारदात से जुड़ा है। बावजूद इसके, आज दिनांक तक पुलिस के हाथ खाली हैं।
शिकायतकर्ता द्वारा जब थाने से जानकारी मांगी गई तो पुलिस का जवाब चौंकाने वाला रहा — “चैन अपने आप बरामद होगी, तब बता देंगे, अभी कुछ नहीं कर सकते।” इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से क्षुब्ध होकर अमित राय ने प्रधानमंत्री शिकायत प्रकोष्ठ एवं सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई, जिसका क्रमांक 347073/2 है।
यहीं से मामला और गंभीर हो गया। आरोप है कि इस शिकायत से नाराज़ होकर थाना आधारताल में पदस्थ आरक्षक अमर पटेल द्वारा अलग-अलग मोबाइल नंबरों से अमित राय को फोन कर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया और धमकियां दी गईं।
अब सवाल यह उठता है कि जब भाजपा सरकार के मंडल अध्यक्ष की ही पुलिस नहीं सुन रही, तो आम नागरिकों के साथ पुलिस का व्यवहार कैसा होगा? क्या शिकायत करना अब अपराध बन गया है? क्या पुलिस व्यवस्था सवाल पूछने वालों को डराने का हथियार बनती जा रही है?
मंडल अध्यक्ष अमित राय ने पुलिस अधीक्षक जबलपुर से आरक्षक अमर पटेल पर कड़ी कार्रवाई करने और लंबित लूट प्रकरण का तत्काल निराकरण करने की मांग की है।
यह मामला न केवल पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि कानून-व्यवस्था की हकीकत भी उजागर करता है — जहाँ न्याय की जगह दबाव और धमकी का सहारा लिया जा रहा है।


