रांझी थाना क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई ने इलाके में चल रहे कथित शराब के नेटवर्क की तस्वीर सामने ला दी है। गांधी व्यायाम शाला क्षेत्र में अलग-अलग मकानों में छिपाकर रखी गई 112 पेटी शराब जब्त की गई है। पुलिस के मुताबिक जब्त शराब में 96 बोतल और 730 पाव अंग्रेजी शराब तथा 4450 पाव देशी शराब शामिल है, जिसकी कुल कीमत करीब 5 लाख 32 हजार 580 रुपए बताई गई है। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कथित मुख्य आरोपी रवि उर्फ बल्लू पटवा फरार है।
थाने से चंद कदमों की दूरी पर वर्षों से चल रहा था कारोबार?:-
पुलिस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि रांझी थाने के ठीक पीछे गांधी व्यायाम शाला क्षेत्र में यदि इतने बड़े पैमाने पर शराब का भंडारण और कथित कारोबार चल रहा था, तो इसकी भनक पुलिस को पहले क्यों नहीं लगी? स्थानीय लोगों का दावा है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों की चर्चा रही है। पुलिस कार्रवाई के बाद अब इन दावों की भी जांच की मांग उठ रही है।
तीन मकानों में मिला शराब का जखीरा:-
पुलिस के अनुसार मुखबिर की सूचना पर तीन अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी गई। महेश यादव के मकान से 2350 पाव देशी शराब और 96 बोतल 8 पीएम व्हिस्की, माया चौबे के मकान की ऊपरी मंजिल से 2000 पाव देशी शराब तथा हेरी सवास्टीन के मकान से 730 पाव बाम्बे रम और 100 पाव देशी शराब बरामद की गई।
पुलिस का कहना है कि इन मकानों को रवि उर्फ बल्लू पटवा ने शराब रखने के लिए किराये पर लिया था। पुलिस के अनुसार संबंधित मकान मालिकों से अलग-अलग किराये पर कमरे लिए गए थे।
मकान किराये पर लेकर बनाया शराब का नेटवर्क!:-
पूरे मामले में यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि कथित रूप से अलग-अलग मकानों में शराब का स्टॉक रखा गया था। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या शराब के अवैध कारोबार के लिए मकानों को बाकायदा स्टोरेज प्वाइंट की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था? पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और फरार रवि उर्फ बल्लू पटवा की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
चार-पांच मकानों की भी चर्चा, संपत्ति की जांच की मांग:-
स्थानीय सूत्रों के हवाले से क्षेत्र में यह चर्चा है कि रवि उर्फ बल्लू पटवा से जुड़े चार-पांच मकान गांधी व्यायाम शाला के आसपास बताए जा रहे हैं। यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ संपत्तियां रिश्तेदारों अथवा परिवार के सदस्यों के नाम पर ली गई हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि जांच में इन संपत्तियों का संबंध आरोपी से सामने आता है तो इनकी खरीद के लिए धन का स्रोत क्या था? संबंधित एजेंसियों द्वारा संपत्तियों, आय के स्रोत और कथित शराब कारोबार से जुड़े आर्थिक लेन-देन की जांच किए जाने की मांग उठ रही है।
हाईटेक निगरानी का भी दावा:-
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कथित शराब कारोबार से जुड़े लोगों द्वारा क्षेत्र में निगरानी के लिए कैमरों का इस्तेमाल किया जाता था। यदि जांच में यह तथ्य सामने आता है तो यह भी पता लगाया जाना जरूरी होगा कि क्या
अवैध कारोबार चलाने वाले लोग पुलिस की गतिविधियों पर भी नजर रखते थे?
नाबालिगों के इस्तेमाल के आरोप भी जांच के घेरे में:-
क्षेत्र में यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि कथित अवैध शराब कारोबार में नाबालिगों से भी काम करवाया जाता था। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसे तथ्य सामने आते हैं तो मामला केवल आबकारी कानून तक सीमित नहीं रहेगा और संबंधित अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत भी जांच का विषय बन सकता है।
ड्राई डे पर बिक्री की तैयारी का दावा:-
पुलिस के मुताबिक इतनी बड़ी मात्रा में शराब 2 अक्टूबर गांधी जयंती के ड्राई डे पर बेचने के लिए जमा की गई थी। ऐसे में कार्रवाई को लेकर पुलिस का कहना है कि समय रहते सूचना मिलने पर स्टॉक जब्त कर लिया गया।
दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी अब भी फरार:-
पुलिस ने मामले में महेश यादव और जॉनी एंथोनी को गिरफ्तार किया है। वहीं पुलिस के अनुसार रवि उर्फ बल्लू पटवा के घर पर ताला मिला और उसकी तलाश जारी है। जिस व्यक्ति की शराब बताकर पुलिस ने लाखों रुपए का माल जब्त किया, वह कार्रवाई के दौरान मौके पर नहीं मिला। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती कथित मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ना है।
पुलिस की कार्रवाई पर शाबाशी, लेकिन उठे कई सवाल:-
अवैध शराब का इतना बड़ा स्टॉक पकड़ना निश्चित रूप से कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसके साथ कई सवाल भी खड़े होते हैं—
थाने के पीछे लंबे समय से कथित रूप से चल रहे इस कारोबार की जानकारी पुलिस को पहले क्यों नहीं मिली?
क्या क्षेत्र में किराये पर लिए गए कई मकानों की गतिविधियों की कभी निगरानी हुई?
क्या इस नेटवर्क में और लोग शामिल हैं?
क्या शराब की सप्लाई करने वाले मुख्य स्रोत तक पुलिस पहुंच पाएगी?
क्या आरोपी से जुड़ी संपत्तियों और आय के स्रोत की जांच होगी?
क्या कथित रूप से नाबालिगों के इस्तेमाल के आरोपों की भी जांच की जाएगी?
और सबसे बड़ा सवाल—यदि इतना बड़ा शराब का स्टॉक इलाके में जमा था, तो यह नेटवर्क अब तक पुलिस की नजर से कैसे बचा रहा?
कार्रवाई के बाद असली जांच अब शुरू:-
रांझी पुलिस की कार्रवाई में लाखों रुपए की शराब जब्त होना मामले की गंभीरता बताता है। लेकिन इस कार्रवाई की सफलता केवल शराब जब्ती तक सीमित नहीं होनी चाहिए। फरार मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी, शराब की सप्लाई लाइन का खुलासा, आर्थिक स्रोतों की जांच और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान ही इस पूरे मामले की असली तस्वीर सामने ला सकती है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि पुलिस फरार रवि उर्फ बल्लू पटवा तक कब पहुंचती है और पूछताछ में अवैध शराब के इस कथित नेटवर्क की कितनी परतें खुलती हैं।
