भोपाल में प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई से डॉक्टरों में नाराजगी
एसोसिएशन ने हाल ही में भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों द्वारा अपनी मांगों को लेकर किए गए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पानी की बौछार और लाठीचार्ज किए जाने का भी विरोध किया है। संगठन का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले चिकित्सकों के साथ इस तरह की कार्रवाई से प्रदेश के चिकित्सा समुदाय में चिंता और नाराजगी का माहौल है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि युवा चिकित्सकों की समस्याओं को बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने के बजाय यदि आंदोलन और विरोध की स्थिति बनती है तो इससे चिकित्सा व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
9 सितंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन:-
एसोसिएशन के अनुसार मेडिकल कॉलेज के डीन से आवश्यक अनुमति प्राप्त होने के बाद 9 सितंबर 2026 से रेजिडेंट डॉक्टर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगे। आंदोलन के दौरान नियमित बाह्य रोगी विभाग यानी ओपीडी की सेवाओं और नियोजित ऑपरेशन से संबंधित कार्यों का बहिष्कार किया जाएगा। हालांकि गंभीर मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन सेवाओं को आंदोलन से अलग रखा गया है। आपातकालीन विभाग में मरीजों का उपचार जारी रहेगा तथा अन्य आवश्यक चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन:-
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक शासन की ओर से इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर उचित, ठोस और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता। एसोसिएशन ने शासन और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि वे मामले को गंभीरता से लेते हुए इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से तत्काल बातचीत करें। संगठन का कहना है कि संवाद के माध्यम से समस्या का समाधान निकाला जा सकता है और आंदोलन समाप्त करने की स्थिति बनाई जा सकती है।
मरीजों की सुविधा का भी रखा जाएगा ध्यान:-
रेजिडेंट डॉक्टरों ने कहा है कि आंदोलन का उद्देश्य मरीजों को परेशान करना या चिकित्सा व्यवस्था को पूरी तरह बाधित करना नहीं है। इसी वजह से आपातकालीन एवं अन्य जरूरी चिकित्सा सेवाओं को जारी रखने का निर्णय लिया गया है। हालांकि नियमित ओपीडी और नियोजित ऑपरेशन का बहिष्कार होने से अस्पताल आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन के सामने भी मरीजों की सुविधा बनाए रखने की चुनौती रहेगी। एसोसिएशन का कहना है कि युवा डॉक्टरों की मांगों को लेकर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाई जा रही है। शासन को भी सकारात्मक रवैया अपनाते हुए मांगों पर शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।
शासन से तत्काल सकारात्मक पहल की अपील:-
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने शासन से अपील की है कि इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर तत्काल सकारात्मक पहल की जाए और उनके प्रतिनिधियों के साथ सार्थक बातचीत की जाए। संगठन ने कहा कि मांगों के समाधान के लिए बातचीत का रास्ता सबसे बेहतर है। एसोसिएशन का कहना है कि इंटर्न डॉक्टर चिकित्सा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अस्पतालों में मरीजों की सेवा के साथ-साथ वे अपने चिकित्सकीय प्रशिक्षण की प्रक्रिया से भी गुजर रहे हैं। ऐसे में उनकी लंबित मांगों पर शासन को संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए।
यह पदाधिकारी आंदोलन में रहेंगे शामिल:-
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन, नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, अध्यक्ष डॉ. दीपक त्रिपाठी, उपाध्यक्ष डॉ. शशांक शेखर पाण्डेय, डॉ. पारसिंह, डॉ. खुशी राम, महासचिव डॉ. राजेन्द्र, स्नातक प्रतिनिधि डॉ. प्रज्ज्वल तिवारी, डॉ. शोभित तिवारी और डॉ. नीतेश नागर के नाम शामिल हैं। एसोसिएशन ने दोहराया कि आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। साथ ही आपातकालीन और आवश्यक चिकित्सा सेवाओं को जारी रखने की बात कही गई है।
चिकित्सा व्यवस्था और सरकार के लिए परीक्षा की घड़ी:-
रेजिडेंट डॉक्टरों के अनिश्चितकालीन आंदोलन की घोषणा के बाद अब शासन और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर इंटर्न डॉक्टरों की मांगों का समाधान करना होगा, वहीं दूसरी ओर अस्पताल में आने वाले मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना होगा, यदि शासन स्तर पर जल्द बातचीत शुरू होती है और मांगों के संबंध में कोई ठोस निर्णय सामने आता है तो आंदोलन समाप्त होने की संभावना बन सकती है। वहीं समाधान नहीं होने की स्थिति में आंदोलन लंबा खिंचने से चिकित्सा सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
रिपोर्ट आशीष विश्वकर्मा
