लगाए आरोप:-
अभिभावकों ने आवेदन में बताया कि अधिकांश छात्रों को मुख्य विषयों में 20 में से केवल 10 अंक तथा अतिरिक्त विषय कंप्यूटर में 50 में से 25 अंक दिए गए। इससे छात्रों का कुल प्रतिशत 12 से 13 प्रतिशत तक कम हो गया। जिन छात्रों के 90 प्रतिशत अंक आने की संभावना थी, वे 77 प्रतिशत तक सीमित रह गए, जबकि 80 प्रतिशत संभावित अंक वाले छात्र 67 प्रतिशत तक रह गए।
महंगी एक्टिविटी से जोड़ा गया:-
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल ने इन्टरनल असिसमेन्ट अंक शैक्षणिक गतिविधियों के आधार पर न देकर महंगी सह.पाठ्यक्रम गतिविधियों से जोड़ा गया, गोवा ट्रिप के लिए लगभग 12 हजार रुपये, एमयूएन एक्टिविटी के लिए 4 हजार 500 रुपये, एनुअल फं क्शन के लिए 850 रुपये, जैसी गतिविधियों में भाग लेने वाले छात्रों को पूरे अंक दिए गए, जबकि इनमें भाग न लेने वाले छात्रों को कम अंक दिए गए।
मानसिक स्थिति पर पड़ा असर:-
अभिभावकों ने बताया कि इस व्यवस्था से बच्चों के परीक्षा परिणाम बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिससे उनके मनोबल, उत्साह और पढ़ाई के प्रति लगन पर नकारात्मक असर पड़ा है। कई छात्र मानसिक रूप से परेशान हैं और इस स्थिति से उबर नहीं पा रहे हैं।
कार्रवाई की मांग:-
अभिभावकों ने कलेक्टर से मांग की है कि स्कूल द्वारा धन के आधार पर अंक देने की कथित व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए तथा छात्रों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही अभिभावकों ने छात्रों की मार्कशीट की छायाप्रतियां भी आवेदन के साथ संलग्न की हैं।