चिकित्सकों के अनुसार नवजात का संपूर्ण रक्त परिवर्तन (ब्लड एक्सचेंज) अत्यंत आवश्यक था और इसके लिए दुर्लभ ओ नेगेटिव रक्त समूह की तत्काल आवश्यकता थी। स्थिति इतनी नाजुक थी कि रक्त उपलब्ध न होने पर शिशु का जीवन बचा पाना कठिन हो सकता था। दुर्लभ रक्त समूह की तलाश में परिजन सैकड़ों लोगों से संपर्क कर रहे थे, लेकिन सफ लता नहीं मिल पा रही थी। इसी बीच सोशल मीडिया के माध्यम से यह सूचना अधिवक्ता एवं समाजसेवी अंकुर जैन तक पहुँची। सूचना मिलते ही अंकुर जैन ने बिना किसी विलंब के अपना समस्त कार्य छोडक़र सिहोरा से जबलपुर पहुंचकर मासूम की जान बचाने के लिए अपना 74वां रक्तदान बंसल ब्लड बैंक में किया। समय पर मिले रक्त से चिकित्सकों ने आवश्यक प्रक्रिया शुरू की और वर्तमान में नवजात का उपचार मेडिकल के एनआईसी वार्ड में जारी है।
ब्लड न मिलने से परिजन हो गए थे परेशान:-
चिकित्सकों ने परिजनों को बताया कि सामान्य डिलेवरी से जन्में नवजात शिशु की मां का ब्लड ग्रुप ओ निगेटिव और शिशु का ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव है, इस वजह से बच्चे का शरीर ओ पॉजिटिव ब्लड ग्रुप को स्वीकार नहीं कर पा रहा है, जिससे उसका पूरा ब्लड ग्रुप बदला जाएगा और ओ पॉजिटिव ब्लड ग्रुप बदलकर नवजात शिशु को ओ निगेटिव ब्लड चढ़ाया जाएगा, जिसके लिए चिकित्सकों ने परिजनों को ओ निगेटिव ब्लड का इंतजाम करने को कहा, फिर परिजन ओ निगेटिव ब्लड ग्रुप न मिलने से परेशान होने लगे, जिसकी सूचना सिहोरा निवासी अंकु र जैन तक पहुंची तब उन्होंने तत्काल नवजात का जीवन बचाने के लिए जबलपुर पहुंचकर रक्तदान किया।
रक्तवीरों, युवाओं व समाजसेवियों के सहयोग से मिलती है प्रेरणा:-
38 वर्षीय अंकुर जैन 46 बार रक्तदान और 28 बार एसडीपी यानि की सिंगल डोनर प्लेटलेट दान कर चुके हैं, वहीं वह सिहोरा में रक्तदान शिविर आयोजित करवाकर जिला चिकित्सालय को हजारों यूनिट ब्लड थैलेसीमिया, सिकिलसेल व अन्य बीमारियों से पीडि़तों के लिए दान करवा चुके हैं, इस नेक कार्य में सिहोरा के युवा व समाजसेवी अंकुर जैन के साथ हमेशा साथ में रहते हैं और निरंतर रक्तदान करते रहते हैं। अंकुर जैन का कहना है कि उनके सभी सेवा कार्यों की प्रेरणा उन्हें अपनी जन्मभूमि सिहोरा और वहां के रक्तवीरों के सहयोग से मिली है। उनके अनुसार समाज की सामूहिक सहभागिता से ही मानवता को जीवित रखा जा सकता है।
ब्लड न मिलने से परिजन हो गए थे परेशान:-
चिकित्सकों ने परिजनों को बताया कि सामान्य डिलेवरी से जन्में नवजात शिशु की मां का ब्लड ग्रुप ओ निगेटिव और शिशु का ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव है, इस वजह से बच्चे का शरीर ओ पॉजिटिव ब्लड ग्रुप को स्वीकार नहीं कर पा रहा है, जिससे उसका पूरा ब्लड ग्रुप बदला जाएगा और ओ पॉजिटिव ब्लड ग्रुप बदलकर नवजात शिशु को ओ निगेटिव ब्लड चढ़ाया जाएगा, जिसके लिए चिकित्सकों ने परिजनों को ओ निगेटिव ब्लड का इंतजाम करने को कहा, फिर परिजन ओ निगेटिव ब्लड ग्रुप न मिलने से परेशान होने लगे, जिसकी सूचना सिहोरा निवासी अंकु र जैन तक पहुंची तब उन्होंने तत्काल नवजात का जीवन बचाने के लिए जबलपुर पहुंचकर रक्तदान किया।
रक्तवीरों, युवाओं व समाजसेवियों के सहयोग से मिलती है प्रेरणा:-
38 वर्षीय अंकुर जैन 46 बार रक्तदान और 28 बार एसडीपी यानि की सिंगल डोनर प्लेटलेट दान कर चुके हैं, वहीं वह सिहोरा में रक्तदान शिविर आयोजित करवाकर जिला चिकित्सालय को हजारों यूनिट ब्लड थैलेसीमिया, सिकिलसेल व अन्य बीमारियों से पीडि़तों के लिए दान करवा चुके हैं, इस नेक कार्य में सिहोरा के युवा व समाजसेवी अंकुर जैन के साथ हमेशा साथ में रहते हैं और निरंतर रक्तदान करते रहते हैं। अंकुर जैन का कहना है कि उनके सभी सेवा कार्यों की प्रेरणा उन्हें अपनी जन्मभूमि सिहोरा और वहां के रक्तवीरों के सहयोग से मिली है। उनके अनुसार समाज की सामूहिक सहभागिता से ही मानवता को जीवित रखा जा सकता है।
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